Image
Image
Image
Image

जगदम्बा के प्रति समर्पण का त्यौहार नवरात्रि

नवरात्रि : १७ अक्टूबर २०२० से २५ अक्टूबर २०२०

Image
Image
Image

नव रात्रि

जिस प्रकार "नव रात्रि" शब्द से ही स्पष्ट हो जाता है कि नौ रात्रि संख्यात्मक नौ (Nine) रात्रि (Nights) ! जिस प्रकार सामान्य जीवन में हम दिन भर काम - काज करने की व्यस्तता में थक जाते है और रात्रि में हम विश्राम कर दूसरी सुबह हम एक नई ऊर्जा को प्राप्त करते है I वैसे ही वर्षभर की कार्य, चिंता आदि से मुक्त होकर नई आध्यत्मिक, मानसिक एवं शारिरिक ऊर्जा का संचय - संवधर्न करने का यह दिव्यतम आध्यत्मिक त्यौहार ही नवरात्र महापर्व है I

नवरात्र में हम देवी दुर्गा माँ के सानिध्य में ९ दिन पूजन अनुष्ठान करते है I अर्थात जीवन के सभी तीनो तत्वों (सत्व, रज, तम) से विश्राम लेकर केवल माँ (जगदम्बा) की शरणागती में आने का ही पर्व नवरात्र है I

जिस प्रकार एक छोटा बालक सभी जगह से नीराश होकर माँ के पास आता है तो उसकी सभी आशाए पूर्ण होती है वैसे ही जगत सभी चिंता, निराशा से मुक्त होने के लिए जगदम्बा की शत में आने से सभी आशाए पूर्ण होती है जो वर्ष भर हमें नई ऊर्जा, सकारात्मकता, समृद्धि, यश एवं किर्ति को प्राप्त करते है I

अभिषेक

अभिषेक में किया जानेवाला संकल्प "अभिषेक" का महत्वपूर्ण अंग है

"तन्मै मन: शिव संकल्प मस्तु "
यजुवैर्द के संकल्प सुक्त में संकल्प की शक्ति का वर्णन मिलता है I जितनी शक्ति कार्य को करते में लगती है वह सम्पूर्ण शक्ति आपके संकल्प का ही परिणाम होता है I

अभिषेक में आपके द्वारा मंत्रो से किया गया संकल्प आपके मन में पवित्र एवं शुभ विचारों, सकारात्मक योजनाओं की स्थापना करता है I संकल्प आपकी योजनाओं को पूर्ण करने की "दॄढ ईच्छा शक्ति" को जागृत करता है I जीवन के प्रत्येक शुभ कार्य इस संकल्प के माध्यम से पूर्ण होते है I जब अभिषेक में मन शांत होता है मन ध्यानस्थ हो जाता है तो देवी पूजा में किया गया "संकल्प" जगदम्बा की कृपा से "आपका संकल्प" शक्तिशाली हो जाता है जिससे कार्य सिद्धि एवं इच्छापूर्ति सहज ही हो जाती है I वह संकल्प आपको अदृश्य एवं अनिर्वचनीय शक्ति प्रदान करता है I

 

अभिषेक का सरलतम अर्थ है शरणागति, समर्पण : जब हम किसी के प्रति अपना समर्पण दिखाते है तो सामने वाला प्रसन्न होकर हृदय से हमें शुभकामानाए देता है I वैसा ही समर्पण जगदम्बा के प्रति हमारा जो है वह है यह अभिषेक :
II “भूमौ शयाना: प्रत्येकं जपेयु शचण्डिका स्तवम्” II
जगदम्बा "माँ" का अर्थ ही होता है :- परोपकारी, दुःख हरण करने वाली, शिव स्वरूपी, कल्याण कर्ता, सर्व मांगल्य करने वाली

"सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके"
उस सर्व मंगल की प्रदाता देवी का जब मंत्र एवं स्तोत्र से अभिषेक होता है तब उस मंत्र एवं स्तोत्रों के नाद से , उच्चारण से प्रकृति पर, वातावरण पर, हमारे चित्त पर उसका एक विशेष प्रभाव पड़ता है जिससे एक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है एवं नकारात्मक भाव दूर होते है I

जब अभिषेक करते है तो जीवन के रोग, कष्ट, अवसाद और कलह के रूप में उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा अभिषेक के माध्यम से वह सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तन होकर शांति, समृद्धि और आनंद में परिवर्तित हो जाती है

यह सकारात्मक ऊर्जा शरिर, मन, आत्मा इन तीनों स्तर पर शांति प्रदान करती है I जिससे हमारे अवसाद, चिंता दूर होती है I
अभिषेक के मंत्रो से अन्तर चेतना की जागृति होती है I

नवचण्डी यज्ञ :

"अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभि:"

यज्ञ समस्त विश्व - ब्रहमाण्ड का मूल है
देवी पूराण में यज्ञ के महत्व का वर्णन मिलता है जिसमे कहा गया है

"सर्वा बाधा निवृत्यर्थ सर्वान् देवान् यजेद्" अर्थात् सभी प्रकार की बाधाओं की निवृति के लिए यज्ञ करना चाहिए I मार्कण्डेय ऋषि द्वारा रचित "दुर्गा शप्तशती" के ७०० श्लोक - मंत्रो के माध्यम से जब यज्ञ होता है वह आपके जीवन की समस्त बाधा : जैसे तांगिक बाधा, धन बाधा, वंश वृद्धि में बाधा, शारिरिक, मानसिक समस्त प्रकार के क्लेशों को समाप्त कर जगदम्बा की कृपा से उन्नति प्राप्त होती है I स्वयं जगदम्बा का वचन है I

II सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः II
तो आइए आप सभी इस नवरात्र में भगवती जगदम्बा आशापुरा, महालक्ष्मी की कृपा का साक्षात् अनुभव किजिए I

श्री सुक्त पाठ

यहाँ दो शब्द है " श्री " और " सूक्तम् " :
सर्व प्रथम "श्री " के अर्थ को जानते है
" हरिम् श्रियते इति श्री " अर्थात भगवान नारायण की पराशक्ति है जो वही "श्री " है अर्थात् भगवती महालक्ष्मी I श्री का अर्थ समृद्धि, यश और किर्ति भी होता है I

श्री सूक्तम्" का महत्त्व : श्री सुक्त चारों वेदों में मिलता है लेकिन इसका निरूपण ऋग्वेद में किया गया है I श्री सुक्त की रचना स्वयं लक्ष्मी के पुत्र आनन्द, कर्दम और चिकलित एवं स्वयं लक्ष्मी जी ने किया है I इसलिए इसका महत्त्व सर्वाधिक है I

जहाँ भी भगवती लक्ष्मीजी का आहवाहन करना हो तो श्री सुक्त के द्वारा ही किया जाता है I अर्थात् जहाँ भी लक्ष्मी का निवास करवाना हो वहां पर श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए | जहाँ पर भी परिश्रम करने के बाद भी दुर्भाग्य से द्रव्य लक्ष्मी की प्राप्ति नही हो तो शुक्रवार १६ श्री सूक्त के पाठ से अवश्य ही द्रव्य लक्ष्मी की प्राप्ति होती है I
इस जगत में श्री सूक्त के पाठ से अवश्य ही लक्ष्मी प्राप्त होती है I भौतिक जगत में दृव्य लक्ष्मी, यश, समृद्धि , किर्ति प्राप्त करने है अचूक उपाय है I

"यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्यो श्वान् विन्देयं पुरुषानहम्" जिस लक्ष्मी के द्वारा भक्त सुवर्ण, उत्तम एश्वर्य, धन, पुत्र- पोत्रादि को प्राप्त करते है एसी भगवती महालक्ष्मी की आराधना इस सूक्त के द्वारा कि जाती है|

विशेष रूप से जब नवरात्रि में 1008 छात्रों द्वारा सामूहिक उच्चारण होता है तो वातावरण में उसका व्यापक असर होता है सामूहिक विधि से श्री सूक्त का उच्चारण करना बहुत प्रभावशाली है उस समय मे श्री सूक्त को सुनना भी लाभकारी सिद्ध होता है । सामान्यतः जन कल्याण की भावना से हम समष्टि का यानि सभी का भला चाहते हैं, इसी उद्देश्य से सामूहिक प्रार्थना करते हैं। समष्टि के कल्याण में ही हमारा कल्याण है।